Aaj Ka Panchang Kya Hai 2026 आज की तिथि, नक्षत्र, योग और करण जानें
Aaj Ka Panchang Kya Hai 2026 जानना हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो शुभ मुहूर्त, दैनिक पंचांग, और ज्योतिषीय गणना को अपने दैनिक जीवन में महत्व देता है। 4 जून 2026, गुरुवार के दिन का पूरा पंचांग नीचे विस्तार से दिया गया है। यह जानकारी प्रतिदिन पंचांग स्रोतों की सहायता से अपडेट की जाती है।
Aaj Ka Panchang 4 जून 2026 गुरुवार को कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि रात 11:30 बजे तक है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 5 जून प्रातः 03:41 बजे तक रहेगा। शुक्ल योग प्रातः 09:03 बजे तक है और राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा।
आज का पंचांग 4 जून 2026 एक नज़र में
नीचे दी गई तालिका में आज के दैनिक पंचांग के सभी मुख्य अंग एक साथ देखे जा सकते हैं। यह जानकारी नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार दी गई है।
| पंचांग अंग | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | कृष्ण पक्ष चतुर्थी (रात 11:30 बजे तक) |
| नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा (5 जून प्रातः 03:41 बजे तक) |
| योग | शुक्ल योग (प्रातः 09:03 बजे तक) |
| करण | बव (प्रातः 10:27 बजे तक), फिर बालव (रात 11:30 बजे तक) |
| वार | गुरुवार (बृहस्पति का दिन) |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष (ज्येष्ठ अधिक मास) |
| सूर्योदय | प्रातः 05:23 बजे (नई दिल्ली के अनुसार) |
| सूर्यास्त | सायं 07:16 बजे (नई दिल्ली के अनुसार) |
| विक्रम संवत | 2083 सिद्धार्थी |
| शक संवत | 1948 परभव |
| चंद्र राशि | धनु (प्रातः 07:41 बजे तक), फिर मकर |
| सूर्य राशि | वृषभ (पूरे दिन) |
| अमांत मास | ज्येष्ठ (अधिक) |
| पूर्णिमांत मास | ज्येष्ठ (अधिक) |
प्रकाशन से पहले समय पुनः सत्यापित करें क्योंकि स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल आज का
आज का अशुभ समय जानना उतना ही जरूरी है जितना शुभ मुहूर्त जानना।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को पंचांग में तीन प्रमुख अशुभ समय माना जाता है। इन समय में नया काम शुरू करना पारंपरिक रूप से उचित नहीं माना जाता।
| अशुभ काल | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक |
| यमगंड | प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक |
| गुलिक काल | दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक |
राहुकाल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश या व्यापार प्रारंभ जैसे शुभ कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। यह पारंपरिक मान्यता पर आधारित है।
आज की तिथि का विस्तृत विवरण
आज कृष्ण पक्ष चतुर्थी है। यह तिथि रात 11:30 बजे तक रहेगी।
हिंदू पंचांग में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है।
कई परिवारों में इस दिन उपवास रखने और संध्या काल में चंद्रदर्शन के बाद पारण करने की परंपरा है। यह केवल पारंपरिक मान्यता है।
तिथि के बारे में मुख्य बातें
- तिथि का नाम चतुर्थी है
- यह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है
- तिथि समाप्ति रात 11:30 बजे होगी
- इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ होगी
- यह ज्योतिषीय गणना के अनुसार है
आज का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र आज 5 जून 2026 को प्रातः 03:41 बजे तक रहेगा।
उत्तराषाढ़ा को 27 नक्षत्रों में से एक माना जाता है। इसका स्वामी सूर्य ग्रह है। कई लोग इस नक्षत्र में यात्रा और नए कार्य प्रारंभ करना शुभ मानते हैं।
लेकिन नक्षत्र का प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग हो सकता है। किसी प्रमाणित ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित रहेगा।
आज का योग और करण
पंचांग के दो और महत्वपूर्ण अंग हैं, योग और करण।
शुक्ल योग आज प्रातः 09:03 बजे तक रहेगा।
योग, सूर्य और चंद्रमा के अंशों के योग से बनता है। पंचांग में कुल 27 योग होते हैं।
करण के बारे में आज का विवरण नीचे दिया गया है
- बव करण प्रातः 10:27 बजे तक रहेगा
- बालव करण रात 11:30 बजे तक रहेगा
- करण, तिथि का आधा भाग होता है
- प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं
शुभ मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त आज का
दैनिक पंचांग में शुभ मुहूर्त सबसे अधिक खोजी जाने वाली जानकारी है।
अभिजित मुहूर्त को पंचांग का सबसे काफी शुभ समय माना जाता है। यह सामान्यतः दोपहर 12:00 बजे के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है।
आज गुरुवार के दिन दोपहर लगभग 11:54 बजे से 12:48 बजे तक का समय अभिजित मुहूर्त के रूप में पारंपरिक रूप से माना जाता है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार यह समय थोड़ा बदल सकता है।
| शुभ समय का प्रकार | अनुमानित समय |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | लगभग 11:54 से 12:48 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | सूर्यास्त से लगभग 24 मिनट पहले |
| ब्रह्म मुहूर्त | सूर्योदय से लगभग 1.5 घंटे पहले |
प्रकाशन से पहले समय पुनः सत्यापित करें क्योंकि स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है।
चंद्र राशि और सूर्य राशि आज की
आज चंद्रमा धनु राशि में है। यह प्रातः 07:41 बजे तक धनु राशि में रहेगा।
उसके बाद चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेगा।
सूर्य आज वृषभ राशि में है और पूरे दिन वृषभ में ही रहेगा।
चंद्र राशि परिवर्तन का समय पूजा, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने में उपयोगी माना जाता है। यह पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता है।
आज का संवत और मास विवरण
हिंदू पंचांग में संवत और मास की जानकारी पूजा संकल्प में आवश्यक होती है।
| संवत विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विक्रम संवत | 2083 सिद्धार्थी |
| शक संवत | 1948 परभव |
| गुजराती संवत | 2082 पिंगल |
| अमांत मास | ज्येष्ठ (अधिक) |
| ऋतु | ग्रीष्म ऋतु |
| अयन | उत्तरायण |
पंचांग के पांच अंग क्या होते हैं
पंचांग शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, “पंच” यानी पाँच और “अंग” यानी भाग।
इसके पाँच मुख्य अंग होते हैं जो किसी भी दिन का ज्योतिषीय स्वरूप तय करते हैं।
- तिथि यानी चंद्र दिवस, सूर्य और चंद्रमा के कोणीय अंतर से तय होती है
- वार यानी सप्ताह का दिन, आज गुरुवार है
- नक्षत्र यानी चंद्रमा जिस तारा समूह में होता है
- योग यानी सूर्य और चंद्रमा के अंशों का योग
- करण यानी तिथि का आधा भाग
इन पाँचों को मिलाकर ही किसी दिन का पंचांग शुद्धि तय होती है। पूजा के संकल्प में इन पाँचों अंगों का उल्लेख किया जाता है।
कई व्यापारी आज भी दुकान खोलने से पहले दैनिक पंचांग देखते हैं। कुछ परिवार यात्रा शुरू करने से पहले शुभ समय देखना पसंद करते हैं।
राहुकाल क्या होता है और क्यों टाला जाता है
राहुकाल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का होता है।
आज गुरुवार को राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता।
राहुकाल में आमतौर पर इन कार्यों से बचा जाता है
- नया व्यवसाय शुरू करना
- विवाह या सगाई का आयोजन
- गृह प्रवेश या नींव खुदाई
- लंबी यात्रा का प्रारंभ
- महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन
हालांकि यह सब पारंपरिक विश्वास पर आधारित है। कोई वैज्ञानिक दावा यहाँ नहीं किया जा रहा।
यमगंड और गुलिक काल का महत्व
यमगंड भी एक अशुभ समय माना जाता है।
आज यमगंड प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक रहेगा।
गुलिक काल दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक रहेगा।
इन दोनों समयों में भी महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत टाली जाती है। यह केवल ज्योतिषीय परंपरा का हिस्सा है।
आज संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व
4 जून 2026 को कृष्ण पक्ष चतुर्थी होने के कारण यह संकष्टी चतुर्थी भी है।
यह दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। अनेक भक्त इस दिन व्रत रखते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत की मुख्य परंपराएं
- दिन भर उपवास रखना
- संध्या काल में गणेश पूजन करना
- चंद्रोदय के बाद चंद्र दर्शन करना
- दूर्वा और मोदक अर्पित करना
- पारण कर व्रत समाप्त करना
यह जानकारी पारंपरिक और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है।
विभिन्न शहरों में पंचांग समय अलग क्यों होता है
यह एक जरूरी बात है जो कई लोग नहीं जानते।
पंचांग के समय शहर-दर-शहर अलग होते हैं।
दिल्ली का सूर्योदय और मुंबई का सूर्योदय एक जैसा नहीं होता। इसलिए राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल के समय भी बदलते हैं।
कुछ उदाहरण
- मुंबई में सूर्योदय दिल्ली से थोड़ा बाद होता है
- चेन्नई और कोलकाता में सूर्योदय पहले होता है
- इसलिए इन शहरों का राहुकाल समय अलग होगा
- अपने शहर का सटीक समय Drik Panchang पर जाकर देखें
ब्रह्म मुहूर्त और उसका महत्व
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले का समय होता है।
आज सूर्योदय 05:23 बजे है। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त लगभग 03:53 से 04:38 बजे तक रहा।
ब्रह्म मुहूर्त में उठने को पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता के लिए लाभदायक माना जाता है।
इस समय किए जाने वाले कार्य
- योग और ध्यान
- वेद पाठ और मंत्र जाप
- स्नान और पूजा की तैयारी
- अध्ययन और पठन
गोधूलि मुहूर्त का समय आज
गोधूलि मुहूर्त सूर्यास्त से लगभग 24 मिनट पहले शुरू होता है।
आज सूर्यास्त 07:16 बजे है। इसलिए गोधूलि मुहूर्त लगभग 06:52 से 07:16 बजे तक रहेगा।
इस समय को काफी पवित्र माना जाता है। गोधूलि का शाब्दिक अर्थ है, गाय के चलने से उड़ने वाली धूल का समय। संध्या प्रार्थना और आरती के लिए यह समय पारंपरिक रूप से उपयुक्त माना जाता है।
आज के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन
पंचांग को रोजमर्रा की जिंदगी से कैसे जोड़ें, यह समझना जरूरी है।
- सुबह 05:23 से 06:00 बजे का समय पूजा के लिए काफी शुभ माना जाता है
- दोपहर 01:30 से 03:00 बजे राहुकाल है, इसमें नए काम न शुरू करें
- अभिजित मुहूर्त में महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना अच्छा माना जाता है
- संध्या 06:52 से 07:16 बजे गोधूलि मुहूर्त में प्रार्थना करें
- आज संकष्टी चतुर्थी है, गणेश पूजा का दिन है
कई व्यापारी दुकान खोलने से पहले और कई परिवार शादी-विवाह की तारीख तय करने से पहले पंचांग जरूर देखते हैं। यह पुरानी परंपरा आज भी जीवित है।
पंचांग की गणना कैसे होती है
पंचांग की गणना वैदिक ज्योतिष पर आधारित होती है।
तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 डिग्री के कोणीय अंतर से बनती है।
नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से तय होता है। चंद्रमा 27 नक्षत्रों में से एक में रहता है।
योग सूर्य और चंद्रमा के अंशों को जोड़कर निकाला जाता है।
करण तिथि का आधा भाग है। हर तिथि में दो करण होते हैं।
इन गणनाओं के लिए सूर्योदय का सटीक समय जरूरी होता है। इसीलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है।
पंचांग क्यों देखा जाता है आज भी
आज के दौर में भी पंचांग की प्रासंगिकता बनी हुई है।
- विवाह मुहूर्त तय करने के लिए
- गृह प्रवेश की तारीख निकालने के लिए
- व्यापार प्रारंभ का शुभ दिन जानने के लिए
- व्रत और त्योहार की सटीक तिथि जानने के लिए
- यात्रा का शुभ समय देखने के लिए
- नामकरण संस्कार का मुहूर्त निकालने के लिए
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज का पंचांग 4 जून 2026 में कौन सी तिथि है?
आज कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि है जो रात 11:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। यह ज्येष्ठ अधिक मास में है। विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 के अनुसार यह तिथि है।
आज राहुकाल कितने बजे से कितने बजे तक है?
आज गुरुवार को राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा। यह नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार है। अपने शहर का सटीक राहुकाल समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
आज का नक्षत्र कौन सा है?
आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है जो 5 जून 2026 को प्रातः 03:41 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। नक्षत्र का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है।
क्या सभी शहरों में पंचांग का समय एक जैसा होता है?
नहीं, पंचांग का समय शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल अलग-अलग होंगे। सटीक स्थानीय समय के लिए Drik Panchang पर अपना शहर चुनें।
संकष्टी चतुर्थी और आम चतुर्थी में क्या अंतर है?
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। दोनों भगवान गणेश को समर्पित हैं। संकष्टी चतुर्थी में चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ने की परंपरा है।
निष्कर्ष
4 जून 2026 का दैनिक पंचांग गुरुवार, कृष्ण पक्ष चतुर्थी, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, शुक्ल योग, बव और बालव करण के साथ है।
राहुकाल दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक रहेगा। आज संकष्टी चतुर्थी होने के कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है। अपने शहर का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग से मिलान करें।
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। यहाँ दी गई पंचांग जानकारी पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय, कानूनी या वित्तीय सलाह के रूप में न लें। सभी समय नई दिल्ली के अनुसार हैं और स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है।
अपनी टिप्पणी लिखें
आपका ईमेल प्रकाशित नहीं होगा।