Rahu Kaal Kya Hai Aaj Ka Friday, 12 June 2026 दिन की योजना बनाने से पहले यह समय जान लें
Rahu Kaal Kya Hai Aaj Ka Friday, 12 June क्या है, यह सवाल हर व्यक्ति के मन में होता है जो दिन की शुरुआत से पहले दैनिक पंचांग देखते हैं।
नई दिल्ली में 12 जून 2026 को सूर्योदय लगभग प्रातः 05:22 बजे और सूर्यास्त सायं 07:18 बजे के आसपास रहने का अनुमान है।
शुक्रवार को राहुकाल दिन के चौथे खंड में पड़ता है, जो दोपहर 12:06 बजे से 01:48 बजे तक रहने की संभावना है।
राहुकाल शुक्रवार 12 जून 2026 का संक्षिप्त उत्तर
शुक्रवार 12 जून 2026 को राहुकाल नई दिल्ली में दोपहर लगभग 12:06 बजे से 01:48 बजे तक रहने की संभावना है। यह दिन का चौथा खंड है। यमगंड प्रातः 07:55 बजे से 09:37 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 03:30 बजे से 05:12 बजे के आसपास रहेगा। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 से 12:48 बजे तक उपयुक्त माना जाता है।
आज का पंचांग 12 जून 2026 शुक्रवार
| पंचांग अंग | जानकारी |
|---|---|
| वार | शुक्रवार (शुक्र का दिन) |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष (ज्येष्ठ/आषाढ़ मास) |
| सूर्योदय | लगभग प्रातः 05:22 बजे (नई दिल्ली) |
| सूर्यास्त | लगभग सायं 07:18 बजे (नई दिल्ली) |
| राहुकाल | दोपहर 12:06 बजे से 01:48 बजे तक (अनुमानित) |
| यमगंड | प्रातः 07:55 बजे से 09:37 बजे तक (अनुमानित) |
| गुलिक काल | दोपहर 03:30 बजे से 05:12 बजे तक (अनुमानित) |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:52 बजे से 12:48 बजे तक (अनुमानित) |
| विक्रम संवत | 2083 सिद्धार्थी |
| शक संवत | 1948 परभव |
| सूर्य राशि | मिथुन |
राहुकाल क्या होता है और इसकी गणना कैसे होती है
राहुकाल हिंदू ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
यह दिन के आठ बराबर खंडों में से एक खंड होता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के पूरे समय को आठ भागों में बांटा जाता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है।
हर वार के लिए अलग खंड निर्धारित है। सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पांचवां, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवां और रविवार को आठवां खंड राहुकाल माना जाता है।
चूंकि जून के महीने में दिन लंबे होते हैं, राहुकाल की अवधि भी थोड़ी बढ़ जाती है। यही कारण है कि हर दिन और हर शहर का राहुकाल अलग-अलग होता है।
शुक्रवार को राहुकाल क्यों खास माना जाता है
परंपरागत मान्यताओं में शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा हुआ है।
कुछ ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मंगलवार, शुक्रवार और रविवार के राहुकाल का प्रभाव बाकी दिनों की तुलना में अधिक माना जाता है। हालांकि यह पारंपरिक मान्यता है, न कि कोई वैज्ञानिक तथ्य।
कई घरों में शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा होती है। ऐसे में राहुकाल से पहले या बाद में पूजा करने की सलाह दी जाती है।
शुक्रवार 12 जून 2026 का राहुकाल प्रमुख शहरों में
हर शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त अलग होता है, इसलिए राहुकाल भी अलग-अलग रहता है। नीचे प्रमुख शहरों के अनुमानित राहुकाल समय दिए गए हैं।
| शहर | राहुकाल समय (अनुमानित) |
|---|---|
| नई दिल्ली | दोपहर 12:06 से 01:48 बजे तक |
| मुंबई | दोपहर 12:22 से 02:00 बजे तक |
| चेन्नई | दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक |
| कोलकाता | दोपहर 11:30 से 01:05 बजे तक |
| बेंगलुरु | दोपहर 12:05 से 01:40 बजे तक |
| हैदराबाद | दोपहर 12:05 से 01:42 बजे तक |
| जयपुर | दोपहर 12:10 से 01:50 बजे तक |
| लखनऊ | दोपहर 11:58 से 01:38 बजे तक |
ये सभी समय अनुमानित हैं। सटीक जानकारी के लिए अपने शहर का नाम Drik Panchang या प्रोकेरला पर दर्ज करके देखें।
12 जून 2026 के दिन की सात ज्योतिषीय समयावधियां
दैनिक पंचांग में केवल राहुकाल ही नहीं, बल्कि कई और समयावधियां होती हैं जो दिन की योजना बनाने में उपयोगी मानी जाती हैं।
| काल / मुहूर्त | समय (नई दिल्ली, अनुमानित) |
|---|---|
| राहुकाल (अशुभ) | दोपहर 12:06 से 01:48 बजे |
| यमगंड (अशुभ) | प्रातः 07:55 से 09:37 बजे |
| गुलिक काल (अशुभ) | दोपहर 03:30 से 05:12 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त (शुभ) | दोपहर 11:52 से 12:48 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त (शुभ) | प्रातः 04:00 से 04:48 बजे |
| विजय मुहूर्त (शुभ) | दोपहर 02:30 से 03:22 बजे |
| गोधूलि मुहूर्त (शुभ) | सायं 07:00 से 07:24 बजे |
राहुकाल की गणना विधि समझें
यह गणना बहुत सरल है।
पहला कदम: सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का कुल समय निकालें। उदाहरण के लिए, अगर सूर्योदय 05:22 और सूर्यास्त 07:18 हैं, तो कुल दिन का समय 13 घंटे 56 मिनट होगा।
दूसरा कदम: इस समय को 8 से भाग दें। प्रत्येक खंड लगभग 1 घंटा 45 मिनट का बनेगा।
तीसरा कदम: शुक्रवार के लिए चौथा खंड राहुकाल है। पहले तीन खंड जोड़ें, जो सूर्योदय के लगभग 5 घंटे 14 मिनट बाद से शुरू होगा।
इसी तरह यमगंड और गुलिक काल की गणना भी होती है। हर वार पर इनका क्रम बदलता है।
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राहुकाल में क्या करना उचित नहीं माना जाता
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में कुछ कार्य टालने की सलाह दी जाती है। यह सांस्कृतिक परंपरा है, न कि कोई बाध्यता।
कई परिवार इन समयों में नए काम शुरू करने से बचते हैं:
- नया व्यापार या दुकान खोलना
- गृह प्रवेश, विवाह, या मंगनी जैसे संस्कार
- नई यात्रा शुरू करना
- सोने-चांदी या संपत्ति की खरीद
- नया निवेश या वित्तीय निर्णय लेना
- नामकरण या अन्य धार्मिक संस्कार
ध्यान रखें: पहले से शुरू किया गया कोई भी काम राहुकाल में जारी रखा जा सकता है। यह नए कार्यों की शुरुआत के लिए ही ध्यान में रखा जाता है।
राहुकाल में कौन से काम किए जा सकते हैं
यह एक सामान्य गलतफहमी है कि राहुकाल में कुछ भी नहीं करना चाहिए।
वास्तव में पारंपरिक मान्यता केवल नए शुभ कार्यों पर लागू होती है। रोजमर्रा के काम, दफ्तर जाना, पढ़ाई करना, खाना खाना, इन सब पर कोई रोक नहीं है।
- राहु से संबंधित पूजा या उपाय
- हनुमान चालीसा का पाठ
- ध्यान और प्रार्थना
- पहले से जारी किसी कार्य को पूरा करना
कुछ पंडित मानते हैं कि राहुकाल में राहु की उपासना करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
यमगंड और गुलिक काल क्या होते हैं
राहुकाल के साथ ही यमगंड और गुलिक काल भी पंचांग में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
यमगंड को यम देवता का काल माना जाता है। इसमें नई यात्राएं और शुभ कार्यों की शुरुआत पारंपरिक रूप से वर्जित मानी जाती है।
गुलिक काल शनि के पुत्र गुलिकन से जुड़ा है। इसे भी पारंपरिक रूप से कम अनुकूल समय माना जाता है।
शुक्रवार 12 जून 2026 को नई दिल्ली के लिए यमगंड प्रातः 07:55 से 09:37 बजे और गुलिक काल दोपहर 03:30 से 05:12 बजे के आसपास रहने का अनुमान है।
अभिजीत मुहूर्त राहुकाल का विकल्प क्यों है
जब किसी दिन कोई उपयुक्त मुहूर्त न हो, तो अभिजीत मुहूर्त को शुभ विकल्प माना जाता है।
यह दिन के ठीक मध्य में पड़ता है। 12 जून 2026 को यह दोपहर लगभग 11:52 से 12:48 बजे तक रहेगा।
ध्यान दें: अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय कभी-कभी एक-दूसरे के करीब होता है या थोड़ा ओवरलैप भी कर सकता है। ऐसी स्थिति में राहुकाल से बाहर का हिस्सा ही उपयोग करें।
शुक्रवार 12 जून 2026 का चौघड़िया
दिन की योजना बनाने के लिए चौघड़िया भी देखा जाता है। यह राहुकाल से अलग गणना पद्धति है।
| चौघड़िया | समय (अनुमानित) | स्वभाव |
|---|---|---|
| चर | 05:22 से 07:04 बजे | सामान्य |
| लाभ | 07:04 से 08:47 बजे | शुभ |
| अमृत | 08:47 से 10:29 बजे | सर्वोत्तम शुभ |
| काल | 10:29 से 12:12 बजे | अशुभ |
| शुभ | 12:12 से 01:54 बजे | शुभ |
| रोग | 01:54 से 03:36 बजे | अशुभ |
| उद्वेग | 03:36 से 05:18 बजे | अशुभ |
| चर | 05:18 से 07:00 बजे | सामान्य |
शुक्रवार को दिन का पहला चौघड़िया चर होता है। अमृत चौघड़िया सबसे शुभ माना जाता है।
राहुकाल और चौघड़िया में क्या फर्क है
यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं।
राहुकाल पंचांग की एक अलग गणना है जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय के आधार पर तय होती है। यह पूरे देश में मान्य है, पर समय स्थान के अनुसार बदलता है।
चौघड़िया भी दिन को आठ खंडों में बांटता है। लेकिन इसमें हर खंड का एक नाम होता है, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, काल, रोग, उद्वेग और चर। चौघड़िया मुख्यतः उत्तर और पश्चिम भारत में ज्यादा प्रचलित है।
कई परिवार दोनों देखते हैं। अगर दोनों शुभ हों, तो उसे अधिक अनुकूल माना जाता है।
राहुकाल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ
राहुकाल की परंपरा लंबे समय से प्रचलित मानी जाती है।
वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। पुराणों में राहु की उत्पत्ति की कथा सूर्य और चंद्र ग्रहण से जुड़ी हुई है। राहु को स्वरभानु का सिर माना गया है, जो अमृत पीने की कोशिश में काटा गया था।
दक्षिण भारत में राहुकाल को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में आज भी कई घरों में राहुकाल देखकर नए काम शुरू किए जाते हैं।
कई व्यापारी आज भी दुकान खोलने से पहले राहुकाल की जांच करते हैं। कुछ परिवार यात्रा या शादी की तारीख तय करते समय राहुकाल से बचने का ध्यान रखते हैं।
राहुकाल से जुड़ी कुछ व्यावहारिक बातें
कुछ सवाल जो लोग अक्सर पूछते हैं।
क्या नौकरी पर जाना या ऑफिस में काम करना राहुकाल में ठीक है ?हां, बिल्कुल ठीक है। राहुकाल केवल नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए है।
क्या राहुकाल में दवाई लेनी चाहिए ?बीमारी और स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी काम राहुकाल में भी किए जा सकते हैं।
क्या परीक्षा देने जाना राहुकाल में उचित है ?अगर परीक्षा का समय पहले से तय है, तो राहुकाल की वजह से उसे टाला नहीं जा सकता।
क्या रात में भी राहुकाल होता है। हां, रात में भी राहुकाल की गणना होती है, पर इसे बहुत कम लोग देखते हैं।
राहुकाल के दौरान क्या उपाय किए जा सकते हैं
पारंपरिक मान्यताओं में राहुकाल के प्रभाव को कम करने के कुछ उपाय बताए गए हैं।
- हनुमान चालीसा या हनुमान अष्टक का पाठ करना
- राहु के बीज मंत्र का जाप करना
- भगवान गणेश की पूजा करना
- शांत मन से ध्यान करना
- नीले या काले रंग की वस्तुएं दान करना
यह सब पारंपरिक सुझाव हैं। इन्हें आस्था और विश्वास के दायरे में ही रखें।
12 जून 2026 के लिए दिन की योजना कैसे बनाएं
सुबह 05:22 से 07:04 बजे तक का समय पूजा-पाठ और ध्यान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
07:04 से 08:47 बजे के बीच लाभ चौघड़िया है। व्यापारिक बातचीत शुरू करने के लिए यह समय काफी अनुकूल माना जाता है।
08:47 से 10:29 बजे अमृत चौघड़िया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए यह दिन का सबसे अच्छा समय है।
12:06 से 01:48 बजे राहुकाल है। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचें।
दोपहर 11:52 से 12:48 बजे अभिजीत मुहूर्त है। हालांकि यह राहुकाल के साथ आंशिक रूप से मेल खाता है, इसलिए 11:52 से 12:06 तक का समय उपयोग किया जा सकता है।
01:48 बजे के बाद राहुकाल समाप्त होता है। दोपहर बाद की योजनाओं के लिए यह समय उचित रहेगा।
साप्ताहिक राहुकाल का नियम
हर वार का राहुकाल तय खंड में होता है। यह नियम स्थायी है, केवल सटीक समय सूर्योदय के अनुसार बदलता है।
| वार | खंड संख्या | अनुमानित समय (6 AM सूर्योदय पर आधारित) |
|---|---|---|
| सोमवार | दूसरा | 07:30 से 09:00 बजे |
| मंगलवार | सातवां | 03:00 से 04:30 बजे |
| बुधवार | पांचवां | 12:00 से 01:30 बजे |
| गुरुवार | छठा | 01:30 से 03:00 बजे |
| शुक्रवार | चौथा | 10:30 से 12:00 बजे (सामान्य दिन में) |
| शनिवार | तीसरा | 09:00 से 10:30 बजे |
| रविवार | आठवां | 04:30 से 06:00 बजे |
जून महीने में दिन लंबे होते हैं, इसलिए हर खंड की अवधि थोड़ी अधिक होती है।
राहुकाल देखने का सही तरीका क्या है
कई लोग सोचते हैं कि दिल्ली का राहुकाल पूरे भारत पर लागू होता है।
यह सही नहीं है। हर शहर का सूर्योदय अलग-अलग होता है, और राहुकाल उसी से तय होता है। मुंबई और कोलकाता का सूर्योदय दिल्ली से लगभग 20-25 मिनट अलग होता है।
सटीक राहुकाल जानने के लिए Drik Panchang पर अपने शहर का नाम और तारीख डालें। वहां हर शहर के लिए अलग-अलग समय दिखाई देता है।
निष्कर्ष
शुक्रवार 12 जून 2026 को राहुकाल दोपहर के समय रहने की संभावना है।
दिन की शुरुआत में लाभ और अमृत चौघड़िया मिलते हैं जो शुभ कार्यों के लिए काफी अनुकूल माने जाते हैं। अगर कोई महत्वपूर्ण काम शुरू करना है, तो सुबह 08:47 से 10:29 बजे के बीच का समय पारंपरिक दृष्टि से उत्तम रहेगा।
राहुकाल एक सांस्कृतिक और ज्योतिषीय मान्यता है। इसे जानकारी के रूप में उपयोग करें। हर निर्णय केवल इसी के आधार पर न लें, अपनी परिस्थिति और व्यावहारिक जरूरतों को भी ध्यान में रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या राहुकाल में पूजा करना ठीक है?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नई पूजा शुरू करना अनुकूल नहीं माना जाता। लेकिन जो पूजा पहले से शुरू हो चुकी है, वह जारी रखी जा सकती है। राहुकाल में हनुमान चालीसा, राहु मंत्र जाप, और ध्यान करना कई पंडित उपयोगी बताते हैं। यह पूर्णतः आस्था और विश्वास पर निर्भर है।
शुक्रवार 12 जून 2026 को राहुकाल कितने बजे है?
नई दिल्ली में शुक्रवार 12 जून 2026 को राहुकाल दोपहर लगभग 12:06 बजे से 01:48 बजे तक रहने का अनुमान है। शुक्रवार को राहुकाल दिन के चौथे खंड में पड़ता है। यह समय आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। सटीक समय के लिए Drik Panchang पर अपने शहर की जांच करें।
क्या राहुकाल और चौघड़िया एक ही चीज हैं?
नहीं, दोनों अलग-अलग गणना पद्धतियां हैं। राहुकाल पंचांग की एक अवधारणा है जो हर वार के एक निश्चित खंड से जुड़ी है। चौघड़िया में दिन के आठों खंडों को नाम दिए जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, काल, रोग, उद्वेग और चर। दोनों का उपयोग शुभ समय तय करने में किया जाता है।
क्या सभी शहरों में राहुकाल का समय एक जैसा होता है?
नहीं। राहुकाल की गणना हर शहर के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होती है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता का राहुकाल एक ही दिन अलग-अलग समय पर पड़ता है। इसलिए हमेशा अपने शहर के अनुसार राहुकाल जांचें।
क्या राहुकाल के दौरान यात्रा करना उचित है?
पारंपरिक मान्यता में राहुकाल में नई यात्रा शुरू करना अनुकूल नहीं माना जाता। अगर यात्रा पहले से तय हो और टाली न जा सके, तो हनुमान चालीसा का पाठ करके निकलने का सुझाव कई जानकार देते हैं। जरूरी और आपातकालीन यात्राओं को राहुकाल की वजह से रोकना व्यावहारिक नहीं है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। यहां दी गई सभी तिथियां, समय और ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है, यह सामग्री किसी भी प्रकार की चिकित्सीय, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है।
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